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हाईटेंशन लाइन से हादसा: मां और तीन बच्चे करंट की चपेट में झुलसे, बिजली विभाग की लापरवाही उजागर

साकेत न्यूज संवाददाता अम्बेडकर नगर

अंबेडकरनगर टांडा नगर के मीरानपुर मोहल्ले में शुक्रवार दोपहर एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब हाजी मंसूर के मकान में हाईटेंशन लाइन से करंट उतरने से पूरा कमरा बिजली की चपेट में आ गया। इस हादसे में जमशेद की पत्नी साजिदा (35) और उनके तीन मासूम बच्चों—आफिया (7), अयान (6) और ईशान (6)—के झुलसने की खबर ने पूरे मोहल्ले को हिलाकर रख दिया। आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने बिजली आपूर्ति बंद कराई और पीड़ितों को तुरंत टांडा सीएचसी पहुंचाया गया।

जहां तीन घंटे के उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे, जब साजिदा और उनके तीन बच्चे दूसरी मंजिल पर कमरे में थे, तभी हाईटेंशन लाइन से करंट अचानक घर में उतर आया। चीख-पुकार सुनकर मोहल्ले वालों ने तत्काल बिजली विभाग को सूचित किया और आपूर्ति बंद कराई। जांच में पता चला कि बिजली के तारों को टकराने से रोकने के लिए लगाई गई बांस की फंटी हादसे की जड़ थी। तेज हवा के कारण फंटी टूटकर घर की दीवार से टकराई, जिससे करंट पूरे कमरे में फैल गया।हादसे ने बिजली विभाग की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया।

इलाके में ज्यादातर बिजली के तार घरों के बेहद करीब से गुजरते हैं, और इन तारों को व्यवस्थित करने के लिए विभाग बांस की फंटियों का सहारा लेता है। यह हादसा इन्हीं फंटियों की खराब स्थिति के कारण हुआ। हादसे के बाद विभागीय कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर फंटी हटाई और तकनीकी खामी को दुरुस्त किया। अधिशासी अभियंता मोहित कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई और जेई को भेजकर समस्या का समाधान कराया गया।इस हादसे ने स्थानीय लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ गुस्सा भड़का दिया है।

मोहल्ले वालों का कहना है कि अगर समय रहते तारों की मरम्मत और उचित इंसुलेशन का इंतजाम किया गया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। लोगों ने मांग की है कि विभाग इस तरह की लापरवाही को तुरंत रोके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।यह हादसा एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। बांस की फंटियों जैसे अस्थायी उपायों पर निर्भरता और तारों की खराब स्थिति ने न केवल एक परिवार को खतरे में डाला, बल्कि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोल दी।

अब सवाल यह है कि आखिर कब तक बिजली विभाग की लापरवाही मासूम जिंदगियों को जोखिम में डालती रहेगी? फिलहाल, साजिदा और उनके बच्चों की हालत स्थिर है, लेकिन इस हादसे ने प्रशासन और बिजली विभाग को तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है।

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