अम्बेडकरनगर नगर पालिका अकबरपुर में हाउस टैक्स वृद्धि ने बीजेपी के भीतर ही भूचाल ला दिया है। चेयरमैन चंद्र प्रकाश वर्मा खुद बीजेपी से हैं, लेकिन उन्हीं की पार्टी के जिला महामंत्री राम शब्द यादव खुलकर विरोध में उतर आए हैं। मंगलवार को उन्होंने अधिशाषी अभियंता को ज्ञापन सौंपते हुए टैक्स वृद्धि को पूरी तरह अवैध बताया।राम शब्द यादव का आरोप है कि पालिका का सर्वे रजिस्टर वर्ष 2021 में बना, लेकिन टैक्स वसूली 2018 से की जा रही है।
यानी जनता पर तीन साल का “बकाया बोझ” जबरन लादा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड की सहमति से अधिकतम 30% वृद्धि ही नियमों के तहत की जा सकती है, जबकि यहाँ जनता से मनमाने ढंग से वसूली हो रही है।महामंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर यह “गैरकानूनी टैक्स डाका” नहीं रोका गया तो सड़क पर आंदोलन होगा। उनके अनुसार टैक्स रसीद पर पालिका की मुहर और कर्मचारी का हस्ताक्षर अनिवार्य होना चाहिए, सरकारी भूमि पर बने मकान कर मुक्त किए जाएं और अनावासीय भवनों को 2% की छूट मिले।सबसे अहम सवाल यह है।
कि बीजेपी का ही जिला महामंत्री जब चेयरमैन की कार्यशैली पर उंगली उठा रहा है तो क्या पार्टी भीतर ही भीतर फूट से जूझ रही है? अकबरपुर की गलियों में अब चर्चा यही है कि पालिका की मनमानी और बीजेपी की खींचतान, दोनों मिलकर जनता की जेब पर भारी पड़ रही हैं।
हाउस टैक्स वृद्धि से जुड़े नियम
नगर पालिका अधिनियम व स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रावधानों के अनुसार हाउस टैक्स में वृद्धि निम्न परिस्थितियों में की जा सकती है—
सर्वे रजिस्टर ,सबसे पहले नगर पालिका द्वारा भवनों का सर्वे व मूल्यांकन किया जाता है।नया कर या वृद्धि सर्वे के वर्ष से ही प्रभावी होती है, पूर्व तिथि से नहीं।पालिका बोर्ड की स्वीकृति हाउस टैक्स में वृद्धि तभी संभव है जब नगर पालिका बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित करे।नियम के अनुसार एक बार में अधिकतम 30% तक की वृद्धि की जा सकती है। जनसुनवाई और अधिसूचना
कर वृद्धि से पहले अधिसूचना जारी कर जनता की आपत्तियाँ मांगी जाती हैं।
बिना आपत्ति निस्तारण और बोर्ड की सहमति के कर वृद्धि वैध नहीं मानी जाती।
विशेष छूटें
सरकारी भूमि पर बने आवास, कुछ धार्मिक/धार्मिक स्थल व सार्वजनिक उपयोग की इमारतें कर मुक्त हो सकती हैं।व्यवसायिक भवनों और अनावासीय भवनों पर अलग दरें लागू होती हैं।ऑनलाइन/पारदर्शी वसूली कर वसूली में पारदर्शिता हेतु ऑनलाइन भुगतान की सुविधा आवश्यक है।रसीद पर पालिका की सील और कर्मचारी का हस्ताक्षर अनिवार्य है।इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि हाउस टैक्स सिर्फ “राजस्व जुटाने का जरिया” नहीं, बल्कि राजनीति की भी सबसे बड़ी चिंगारी बन सकता है।



