साकेत न्यूज संवाददाता अम्बेडकरनगर
अंबेडकर नगर जनपद के महामाया राजकीय संयुक्त चिकित्सालय (महामाया मेडिकल कॉलेज) के वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने कहा है कि कूल्हे की हड्डी में रक्त संचार रुकने से होने वाले अवास्कुलर नेक्रोसिस (AVN), घुटने-कूल्हे का घिसाव (ऑस्टियोआर्थराइटिस), स्पोर्ट्स इंजरी और हड्डी का न जुड़ने (नॉन-यूनियन) जैसी स्थितियों में अब मरीजों को तुरंत हिप या नी रिप्लेसमेंट कराने की जरूरत नहीं है।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि पहले अवास्कुलर नेक्रोसिस के मध्यम स्टेज में पहुँचते ही मरीज को हिप रिप्लेसमेंट कराना पड़ता था, लेकिन अब महामाया मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नई तकनीक से शुरुआती और मध्यम स्टेज के मरीजों में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को 8-10 साल या उससे अधिक समय तक टाला जा सकता है। कई मामलों में सर्जरी की जरूरत ही खत्म हो जाती है।उन्होंने कहा, “हमारे पास अब ऐसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है कि मरीज के अपने शरीर से ही कोशिकाएँ लेकर उन्हें कूल्हे के प्रभावित हिस्से में डाला जाता है। इससे मरी हुई हड्डी फिर से जीवित हो जाती है और जोड़ की कार्यक्षमता लौट आती है।
यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और मरीज को अगले ही दिन चलने-फिरने की इजाजत मिल जाती है।”डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक कई मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है और वे बिना हिप रिप्लेसमेंट के सामान्य जीवन जी रहे हैं। खास बात यह है कि यह सुविधा सरकारी अस्पताल में उपलब्ध होने से इलाज का खर्च भी बहुत कम है।
महामाया मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक विभाग में इस नई तकनीक की शुरुआत के बाद अंबेडकर नगर, अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी और आसपास के जिलों के मरीज बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि कोई भी मरीज समय से पहले हिप या नी रिप्लेसमेंट की मजबूरी में न आए। अब मरीजों को लखनऊ, दिल्ली या मुंबई नहीं भटकना पड़ेगा।”



