वीसी के भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रमबद्ध आंदोलन का एलान

अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच व बर्खास्तगी की मांग को लेकर छात्र नेताओं ने चरणबद्ध आंदोलन का एलान कर दिया है। पहले चरण में 13 मई को गांधी पार्क में धरना देकर प्रदर्शन करेंगे। यह जानकारी पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आलोक ¨सह ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि यह समूचा आंदोलन छात्र संघर्ष मोर्चा के बैनर तले होगा। आंदोलन की जिम्मेदारी साकेत महाविद्यालय के उपमंत्री नागेश प्रातप ¨सह व समाजवादी छात्र सभा के नेता शिवांशु तिवारी को सौंपी गई है। इस मौके पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष व भाजपा नेता राजमणि ¨सह ने कहा कि वीसी के भ्रष्टाचार व उनके भ्रष्ट सहयोगियों के खिलाफ निरंतर आंदोलन चलाया जाएगा। कहा कि कुछ शिक्षक हैं, जो पढ़ाते नहीं सिर्फ पैनल करते हैं। वीसी के आगे-पीछे घूमते हैं। उन्होंने आरोप लगाया वीसी ने अपने चहेतों की पदोन्नति कर दी। जो शिक्षक पढ़ाते लिखाते हैं, उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई। कहा कि साथ ही जनता के बीच में वीसी के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जाएगा। पूर्व अध्यक्ष गौरव सागर, शहनवाज खान व बहुजन छात्र दल के अध्यक्ष अजय कुमार आजाद, सूर्यभान आजाद ने कहा कि वीसी के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अजय आजाद ने कहा कि विवि परिसर से लेकर महाविद्यालयों में पढ़ाई का हाल खराब है। छात्र सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार मौर्य व पूर्व महामंत्री अद्याशंकर ¨सह ने कहा कि वीसी के तीन साल के कार्यकाल में शोध कार्य भी बाधित हुआ है। कहा कि नकल रोकने के नाम पर धनउगाही की जा रही है। मोर्चा के संयोजक व उपमंत्री नागेश प्रातप ¨सह ने बताया कि क्रमवार तरीके से आंदोलन चलाया जाएगा। 13 मई को प्रत्येक चरण के आंदोलन की घोषणा की जाएगी। पत्रकार वार्ता में छात्रनेता आयुष ¨सह, धर्मेंद्र मिश्र, शेखर ¨सह, शशांक पांडेय, सुजीत विक्रम ¨सह, दीपक यादव सहित अन्य मौजूद रहे। संयोजक नागेश प्रताप ¨सह ने 13 को गांधी पार्क में पहुंचने का आह्वान |

भूमि पर अवैध कब्जे

गोरखपुर-बस्ती फोरलेन के दोनों तरफ वन विभाग की संरक्षित जमीन पर जगह-जगह अतिक्रमण है। कई जगह तो पक्के निर्माण करा लिए गए हैं, वहीं कई स्थानों पर अस्थाई झोपड़ियां लगाकर लोग कब्जा जमाए हुए हैं। कुछ स्थान तो ऐसे हैं जहां सड़क किनारे झोपड़ियां दिखाई पड़ती हैं। गिट्टी, बालू, चाय-पान, टायर की गुमटी सहित कई तरह के व्यापार भी धड़ल्ले से किए जा रहे हैं।

अतिक्रमण को हटाने को लेकर कई बार मांग हुई, लेकिन हर बार के अभियान में सरकारी तंत्र के निशाने पर नगर पंचायत के दुकानदार ही रहते हैं लेकिन अगर कस्बे से थोड़ा हटकर देखा जाए तो गोरखपुर-बस्ती फोरलेन के दोनों तरफ वन विभाग की संरक्षित जमीन पर खूब अतिक्रमण किए गए हैं। अलग-अलग स्थानों पर अतिक्रमण का प्रकार भी अलग-अलग है। कहीं लोग झोपड़ियां बनाकर कब्जा जमाए हुए हैं तो कहीं पक्का निर्माण करके सरकारी जमीन को अपना बना लिए हैं। सहजनवां थाने चौराहे से लेकर कालेसर जीरो प्वाइंट तक वन संरक्षित जमीन पर बेखौफ कब्जा किया गया है, जो वर्ष भर ऐसी ही पड़ा रहता है। यही नहीं जमीन पर कुछ लोग मार्बल तो अन्य बि¨ल्डग मटेरियल सामाग्री बेचने की दुकान सजाए हुए हैं। नगर के प्रबुद्धजनों का कहना है कि अपने घर व दुकान के सामने के जमीन का उपयोग स्वभाविक रूप से कोई भी करेगा लेकिन उपयोग जब कब्जा का रूप ले लेता है तो वह गलत है। प्रभागीय वनाधिकारी एनके जानू का कहना है कि वन संरक्षित भूमि पर अवैध कब्जे की जानकारी मिली है। जांच कराकर उसे हटाया जाएगा।

सम्मानित हुई प्रेरणादायी माताएं

मदर्स डे के मद्देनजर मातृत्व को समर्पित कार्यक्रम ‘मां तुझे प्रणाम’ का भव्य आयोजन हुआ। कांति देवी चैरिटेबल एवं डेंटल स्पा हेल्थ फाउंडेशन कार्यालय पर बुधवार को आयोजित भव्य समारोह में विपरीत परिस्थितियों से अकेले लड़कर बच्चों की अच्छी परवरिश करके उन्हें समाज में पहचान दिलाने वाली माताएं ऊषा, रूपा, अनीता, गुंजना अरुण सम्मानित हुई। संयोजक डॉ. कनिका अग्रवाल ने माताओं को सम्मानित करते हुए उनके योगदान को प्रेरणादायी बताया। कहा कि मां ममता तथा स्नेह की प्रतिमूर्ति है। बच्चों की खुशी के लिए वह हर त्याग करने को हर समय तैयार रहती है। बच्चों को चाहिए कि वह मां को उचित सम्मान दें। बुजुर्ग होने पर उन्हें उपेक्षित न करें, बल्कि अच्छी तरह से देखरेख करें, क्योंकि हमारी संस्कृति यही सीख देती है।

खून से लाल हो रहीं जिले की जर्जर सड़कें

जनपद में जर्जर सड़कों का जाल बिछा हुआ है। इसकी वजह से आएदिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इससे शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें खून से लाल हो रही हैं। जनपद के कुछ स्थानों पर ऐसे हादसे हुए जिससे लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इस तरह की दुर्घटनाओं में आएदिन किसी का सुहाग, कोई बेटा, किसी की पत्नी व कोई रिश्तेदार खो रहा है। इन दुर्घटनाओं में 14 से 30 वर्ष के ज्यादातर बाइक सवार युवा ही शामिल हैं। कदाचित इन घटनाओं में 45 से 60 वर्ष के लोगों की मौत होती है। आजमगढ़ से मऊ, वाराणसी, ठेकमां, शाहगंज व फैजाबाद जाने वाली सड़कों पर ज्यादा ही दुर्घटनाएं हो रही हैं। यहां होने वाली घटनाओं से लोगों के रूह कांप उठते हैं। जनपद के कौड़िया व गंभीरपुर में हुए भीषण हादसे लोगों की याद ताजा कर देती है। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष सड़क हादसे की घटनाएं ज्यादा हुई हैं। जनपद की सड़कों पर चलने वाले सवारी वाहनों की जांच पड़ताल की जाए तो लगभग 70 फीसद अप्रशिक्षित चालक वाहनों का संचालन करते मिलेंगे। इसके लिए संबंधित महकमा भी कम जिम्मेदार नहीं है। दुर्घटनाएं तीन कारणों से होती हैं। अप्रत्याशित वाहनों की बढ़ रही तादात, सड़क पर अतिक्रमण और बौद्धिक रूप से प्रशिक्षित न होना है। किशोरवय बच्चों को दो पहिया वाहन का संचालन करने की अनुमति देने वाले अभिभावक भी किसी गुनहगार से कम नहीं है। सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं पर यदि नजर डाली जाए तो मौत और अपंगता के शिकार होने वाले अधिसंख्य कम उम्र के युवा शामिल हैं। वाहनों की गति पर अंकुश लगाने की कोई व्यवस्था ही नहीं है जिसका नतीजा कि जनपद में प्रत्येक वर्ष लगभग 300 से अधिक लोग असमय काल के गाल में समा रहे हैं। गंभीरपुर क्षेत्र के रोहुआं मोड़ व गोमाडीह में हुई दुर्घटनाओं से आज भी लोग सिहर उठते हैं। रोहुआं मोड़ के पास धार्मिकस्थल से मुंडन संस्कार कार्यक्रम से घर लौट रहे परिवार के आधा दर्जन से ज्यादा सदस्य हादसे में अपनी जान गंवा बैठे थे। दूसरी तरफ गोमाडीह गांव में आयोजित वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान अनुबंधित बस की चपेट में आने से दस से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही कप्तानगंज क्षेत्र के कौड़िया बाजार में रामलीला मंचन के दौरान बेकाबू जीप ने दर्शकों को कुचल दिया। इससे दर्जन भर लोगों की मौत हो गई थी। इसी प्रकार कप्तानगंज के मंदुरी के तिराहे पर कई दुर्घटनाएं ऐसी हुई, लोग सिहर जाते हैं।

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सात पुत्रियों के सिर से उठा पिता का साया

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पुत्र-पति खोने के बाद पत्नी की हालत बदतर

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फोटो :::::23सी, 24 व 25सी

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आजमगढ़ : सड़क हादसे ने सात पुत्रियों के सिर से पिता का साया जहां छीन लिया वहीं पत्नी ने पुत्र व पति को खो दिया। इसके बाद पूरे परिवार की हालत बदतर हो गई है। परिवार पर संकट के बादल छाए हुए हैं।

यह दुर्घटना मुबारकपुर थाना क्षेत्र के कटरा चौक पर एक सितंबर 2016 को हुई थी। इस दौरान ट्रक व बाइक की टक्कर में नेवादा अमिलो निवासी आफताब आलम (50) व उनके एकलौते पुत्र अब्दुल्लाह (22) की मौत हो गई। परिवार में पत्नी ताहेरा खातून व सात पुत्रियां बेसहारा हो गईं। उस दिन पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। घटना का कारण कटरा चौक पर लगाई गई हाईमास्ट लाइट और रेहड़ी लगाने वालों द्वारा किया गया अतिक्रमण बताया जाता है। चूंकि जीयनपुर-मुबारकपुर मुख्य मार्ग पर स्थित कटरा चौक वाली सड़क मात्र 15 फुट चौड़ी है जिसमें नगर पालिका परिषद द्वारा लगाई गई हाईमास्ट लाईट के बनाए गए चबूतरे में दो मीटर परिधि की भूमि घिर गई है। इससे लाइट के दोनों तरफ सड़क की चौड़ाई मात्र छ: फुट से भी कम रह गई है। इससे आने वाले बड़े वाहन अचानक सड़क से नीच उतर जाते हैं। पिछले दो वर्षों में एक घटना के अलावा भी तीन मौतें हो चुकी हैं। बीते एक सितंबर को दुर्घटना में पिता-पुत्र की हुई मौत के बाद पत्नी ताहेरा खातून व पुत्रियां सकीना बानो, जमीला बानो, सीबा परवीन, शहला असगरी, जेबा तबस्सुम, सबा अंजुम व सना मरियम पूरी तरह से बेसहारा हो चुकी हैं। मौत के पहले अब्दुल्लाह सठियांव स्थित एक निजी डिग्री कालेज में ¨प्रसिपल के पद पर मानदेय पर कार्य करता था। परिवार की स्थिति को देखते हुए प्रबंधक द्वारा सीबा परवीन को विद्यालय में अध्यापक पद पर रख लिया गया है। बाकी बहनों की पढ़ाई व दैनिक खर्च के लिए कुछ ऐसे समाजसेवी कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदारी संभाल रखी है लेकिन गोपनीय तरीके से।

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लोग नहीं भूल पाए सगे भाइयों की मौत

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फोटो ::::26सी

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आजमगढ़ : कप्तानगंज थाना क्षेत्र के देउरपुर बाजार निवासी दो सगे भाइयों की हुई मौत को आज भी क्षेत्रवासी भूल नहीं पाए हैं। भाई की ससुराल से लौट रहे दोनों भाई काल के गाल में समां गए। यह दुर्घटना 16 अगस्त 2014 को शाम चार बजे के करीब हुई थी। घटना के समय देउरपुर बाजार निवासी 17 वर्षीय सरवर व 20 वर्षीय दिलशेर बाइक से भाई की ससुराल बाइक से रौनापार जा रहे थे। वह अपने घर से जैसे ही दो किलोमीटर के समीप महराजगंज-देउरपुर मार्ग पर पहुंचे तभी पुलिस की गाड़ी से बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद लोगों ने देउरपुर बाजार में चक्काजाम कर दिया था। मृतक दिलशेर की शादी हुई थी। उसकी पत्नी हसीबुननिशा, बेटे 8 वर्षीय शबा, 7 वर्षीय साहिल व 5 वर्षीय लाडली के सिर से पिता का साया उठ गया। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। चार भाइयों में दो भाइयों की मौत ने सभी को हिला दिया था। आज भी इनका परिवार सदमा झेल नहीं पाया है। वैसे भाई आलम व शमशेर परिवार की गाड़ी को पटरी पर खींच रहे हैं।

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तीन वर्ष का तुलनात्मक विवरण

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वर्ष-घटनाएं-मृत्यु-घायल

2014-337- 202– 234

2015- 308- 222- 205

2016- 381- 230- 209

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जनपद में दुर्घटना के प्रमुख स्थल ::::

बवाली मोड़, नरौली तिराहा, रानी की सराय थाना, रानी की सराय सैय्यदवारा, गोमाडीह, कौड़िया, रानीपुर पेट्रोल पंप, जीयनपुर चौक, मंदुरी तिराहा, कंधरापुर थाना के समीप, सिधारी शंकर तिराहा, मुबारकपुर मार्ग, देउरपुर बाजार, बरदह बाजार, ठेकमां बाजार, मुहम्मदपुर, ¨बद्रा बाजार आदि।

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दुर्घटना के बाद लोगों के शरीर पूरी रह से छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। कभी-कभी स्थिति तो यह होती है कि शव की पहचान भी नहीं हो पाती है। दुर्घटना में बच गए लोग की हड्डियां भी टूट जाती है। इससे लोग अपंग हो जाते हैं। इस संबंध में जागरण ने जिला अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन डा. सुभाष ¨सह से बातचीत की गई।

-दुर्घटना में घायल की रीढ़ से लेकर सभी हड्डियां हिल जाती हैं।

-दुर्घटना में लोगों के चेहरे भी विचित्र हो जाते हैं।

-कभी-कभार तो जीभ भी कट जाती है।

-सिर में चोट लगने पर घटनास्थल पर ही मौत हो जाती है।

-पैर की हड्डिया टूटने पर इलाज के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है।

-खासकर फेफड़े भी तितर-बितर हो जाते हैं।

-कभी-कभी सिर भी कुचल जाता है। इससे सिर के सारे हिस्से डैमेज हो जाते हैं।

-नाक की हड्डिया भी टूट जाती हैं।

-फेफड़ भी छलनी हो जाता है।

-सिर फट जाता है।

-हल्की दुर्घटना में मांसपेसियां रगड़ जाती हैं।

-दुर्घटना में आंख भी हो जाती है प्रभावित

 

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